आरबीआई की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) राज्यों के लिए एक गंभीर वित्तीय चुनौती बनी हुई हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य डिस्कॉम का कुल संचित घाटा 6.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जो राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद का 2.4 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि डिस्कॉम की समस्याओं को सुलझाने के लिए विभिन्न सुधार प्रयासों के बावजूद खामियां बनी हुई हैं। आरबीआई ने इस स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक कदमों का सुझाव दिया है, जिसमें उत्पादकता में सुधार, ट्रांसमिशन और वितरण घाटे को कम करना और बिजली आपूर्ति की वास्तविक लागत के साथ टैरिफ को एडजस्ट करना शामिल है।
रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु
कौन: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)
क्या: डिस्कॉम के वित्तीय हालात की रिपोर्ट जारी की गई।
कहाँ: भारत में विभिन्न राज्य।
कब: 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार।
क्यों: बिजली वितरण कंपनियों के बढ़ते घाटे और राज्य सरकारों पर वित्तीय दबाव की स्थिति पर प्रकाश डालने के लिए।
कैसे: सरकार को सुधारात्मक उपायों के द्वारा स्थिति को बदलने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
आरबीआई की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि “बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) राज्यों पर वित्तीय रूप से बोझ बनी हुई हैं।” इसके मुताबिक, विभिन्न सुधार प्रयासों के बावजूद डिस्कॉम के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्यों ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में आगे बढ़ते हुए, 2023-24 में सकल राजकोषीय घाटा (GFD) सकल घरेलू उत्पाद के 2.91 प्रतिशत पर सीमित रखा है।
विभिन्न राज्य सरकारों ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं लेकिन डिस्कॉम के बढ़ते घाटे ने उन्हें नए संकट में डाल दिया है। डिस्कॉम का कुल संचित घाटा 2022-23 तक 6.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राशि न केवल राज्य के वित्तिय स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह देश के आर्थिक स्थिरता पर भी प्रभाव डाल सकती है।
डिस्कॉम के समस्या के कारण
डिस्कॉम के घाटे के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, बिजली की वास्तविक लागत और टैरिफ के बीच का अंतर है। दूसरी ओर, वितरण और ट्रांसमिशन में घाटा भी इस समस्या को बढ़ाता है। अगर हम देखें, तो कई बार कंपनियों को बिजली का सप्लाई बिना भुगतान के करना पड़ता है, जिससे उनके राजस्व में कमी आती है। इसके अलावा, उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी की प्रणाली भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है, जिससे उन्हें अपने वित्तीय घाटे को संतुलित करने में कठिनाई होती है।
सुधार के उपाय
आरबीआई ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, ट्रांसमिशन और वितरण घाटों को कम करना और वास्तविक लागत के साथ टैरिफ को समायोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, राज्यों को दीर्घकालिक निवेश योजनाएँ बनानी चाहिए ताकि वे अपने डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को मजबूत कर सकें।
सुधार के लिए यह भी जरूरी है कि राज्य सरकारें ऊर्जा के अधिक स्थायी स्रोतों के लिए नीति बनाएं, ताकि वे डिस्कॉम के वित्तीय घाटे को कम कर सकें। इसके लिए नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश करना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
भविष्य की संभावनाएँ
आरबीआई की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं, तो 2024-25 में राज्यों के लिए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की बेहतर संभावना हो सकती है। इस वर्ष GFD का बजट सकल घरेलू उत्पाद का 3.2 प्रतिशत होने का अनुमान है।
इसके साथ ही, पूंजीगत व्यय, जो बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक विकास का संकेतक है, 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद का 2.6 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष 2.2 प्रतिशत था। यह दर्शाता है कि राज्य सरकारें विकास की योजनाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
तथ्य और आंकड़े
As per the report by भारतीय रिजर्व बैंक, डिस्कॉम के द्वारा उठाए गए कदमों का प्रभाव सीधा राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है। यह स्थिति न केवल राज्यों की विकास योजनाओं को प्रभावित करती है, बल्कि यह देश की आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
राज्यों के लिए चुनौती
राज्यों के लिए यह आवश्यक है कि वे डिस्कॉम के सुधार में सक्रिय भूमिका निभाएं। केवल तभी वे अपने वित्तीय स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं और दीर्घकालिक विकास की ओर बढ़ सकते हैं। यदि ये सुधार सही समय पर नहीं किए गए, तो इससे न केवल राज्य का वित्त बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।

