Friday, March 13, 2026

विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% किया

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विश्व बैंक ने आज मंगलवार को जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में भारत की विकास दर के अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। यह वृद्धि भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन को दर्शाती है, विशेषकर चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य के बीच।

‘भारत के व्यापार अवसर’ शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की अर्थव्यवस्था ने 8.2% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। इस वृद्धि को मुख्य रूप से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश और रियल एस्टेट क्षेत्र में घरेलू निवेश से बल मिला है।

रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में 9.9% की बढ़त हुई है, जबकि सेवा क्षेत्र ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे कृषि क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन की भरपाई हो सकी। शहरी बेरोजगारी दरों में भी सुधार हुआ है, खासकर महिला श्रमिकों के बीच, जिनकी बेरोजगारी दर वित्तीय वर्ष 2024-25 की शुरुआत में घटकर 8.5% रह गई थी। हालांकि, शहरी युवा बेरोजगारी दर अभी भी 17% के उच्च स्तर पर बनी हुई है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त की शुरुआत में 670.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिससे 11 महीने से अधिक का आयात कवर सुनिश्चित हुआ। साथ ही, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का ऋण-से-जीडीपी अनुपात वित्तीय वर्ष 2023-24 में 83.9% से घटकर वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 82% तक आ सकता है।

भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि गरीबी घटाने में सहायक : ऑगस्टे तानो कौमे

विश्व बैंक के भारत स्थित कंट्री निदेशक ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा, “भारत की मजबूत विकास संभावनाएं और घटती मुद्रास्फीति गरीबी को कम करने में मदद करेंगी। वैश्विक व्यापार क्षमता का दोहन करके भारत अपनी वृद्धि को और अधिक बढ़ा सकता है।”

कौमे ने भारत के निर्यात बास्केट में विविधीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया और सुझाव दिया कि आईटी, व्यावसायिक सेवाओं और फार्मास्यूटिकल्स में अपनी मजबूती के साथ, देश को कपड़ा, परिधान, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स और हरित प्रौद्योगिकी उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भी निर्यात का विस्तार करना चाहिए।

भारत के 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापारिक निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आईडीयू ने तीन-आयामी दृष्टिकोण की सिफारिश की है, जिसमें व्यापार लागत को कम करना, व्यापार बाधाओं को हटाना और व्यापार एकीकरण को गहरा करना शामिल है।

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