सरकार ने लोकसभा में वक्फ संपत्तियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किया है, जिसे अब संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने की सिफारिश की गई है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024’ पेश किया और इसके साथ ही ‘मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024’ को भी प्रस्तुत किया, जो पुराने अधिनियमों को समाप्त करेगा। लोकसभा अध्यक्ष ने सभी दलों से चर्चा के बाद जेपीसी के गठन की बात कही है।
विधेयक का विपक्ष ने विरोध किया
लोकसभा में विपक्ष ने एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध किया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (एसपी), वाइएसआर कांग्रेस, द्रमुक, नेशनल कांफ्रेंस, माकपा, भाकपा, एआईएमआईएम और एआईएमएल सहित कई विपक्षी पार्टियों ने विधेयक के खिलाफ आवाज़ उठाई। हालांकि, जनता दल (यू) और शिवसेना ने इसका समर्थन किया, जबकि तेलगु देशम पार्टी ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की सिफारिश की।
विपक्ष के सवालों का केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब
विपक्ष के नेताओं ने विधेयक पर कई मुद्दों को उठाया, जिनका जवाब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दिया। शून्यकाल के बाद विधेयक पर करीब ढाई घंटे की चर्चा हुई। इसके बाद मंत्री ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की सिफारिश की।
विधेयक की व्यापक चर्चा और प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक व्यापक चर्चा के बाद प्रस्तुत किया गया है और इसमें कांग्रेस सरकार द्वारा की गई सिफारिशों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है और वक्फ बोर्ड में सभी मुसलमानों के वर्गों के लिए स्थान की कमी है। इससे जुड़े कानूनों का अनुचित उपयोग विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है और वक्फ संपत्तियों की घोषणाओं में माफिया का हस्तक्षेप बढ़ गया है।

