प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 82वीं वर्षगांठ के मौके पर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर, उन्होंने औपनिवेशिक शासन से भारत की आजादी के संघर्ष में इस आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किए गए अपने पोस्ट में कहा, “बापू के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम पड़ाव था।”
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक वीडियो संदेश भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, “आज भारत एक स्वर में भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टिकरण भारत छोड़ो का आह्वान कर रहा है।” संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करने की मांग के तहत शुरू किया गया था।
9 अगस्त 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इसने अंग्रेजों को यह समझने पर मजबूर किया कि भारत पर उनका शासन जारी रखना अब संभव नहीं है, और उन्हें देश छोड़ने पर विचार करना पड़ा। इस आंदोलन के साथ अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां महात्मा गांधी ने ‘भारत से व्यवस्थित ब्रिटिश वापसी’ का आह्वान किया।
महात्मा गांधी ने इस आंदोलन के दौरान सभी भारतीयों से ‘करो या मरो’ का आह्वान किया था। गांधी जी के प्रेरणादायक भाषणों ने लोगों को यह संदेश दिया कि “हर भारतीय जो स्वतंत्रता चाहता है, उसे इसके लिए खुद मार्गदर्शक बनना होगा।” 1942 में इसी दिन गांधी जी ने अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालने के लिए ‘करो या मरो’ का नारा दिया था। यह आंदोलन मुंबई के ग्वालिया टैंक से शुरू हुआ था, और हर साल इस दिन को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

