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Wednesday, January 21, 2026

29 जून से शुरू होगी श्री अमरनाथ यात्रा, एडीजीपी ने उच्च अधिकारियों व सुरक्षाबलों के साथ की समीक्षा बैठक

इंडिया29 जून से शुरू होगी श्री अमरनाथ यात्रा, एडीजीपी ने उच्च अधिकारियों व सुरक्षाबलों के साथ की समीक्षा बैठक

अमरनाथ यात्रा 2024: सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा बैठक और पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी

सुरक्षा समीक्षा बैठक

एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) और एसडीआरएफ के सह कमांडेंट जनरल विजय कुमार ने आईजीपी कश्मीर वीके बिरदी और अन्य अधिकारियों के साथ 29 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा बैठक की। इस साल, अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू होकर 29 अगस्त को समाप्त होगी।

उपकरणों का निरीक्षण

एक अधिकारी के अनुसार, शीर्ष अधिकारियों ने यात्रा से पहले सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण किया और संबंधित टीमों को आवश्यक जानकारी दी। इस बैठक में डीआईजी दक्षिण कश्मीर, डीआईजी सशस्त्र, कमांडिंग ऑफिसर एनडीआरएफ और कमांडिंग ऑफिसर एसडीआरएफ भी शामिल थे। विभिन्न सुरक्षा बलों की टीमों को यात्रा मार्गों पर तैनाती के लिए रवाना किया गया।

यात्रा पंजीकरण प्रक्रिया

जम्मू में 26 जून से अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके लिए पांच पंजीकरण केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से दो केंद्र साधुओं के लिए आरक्षित रहेंगे। इन केंद्रों पर ठहरने और खाने-पीने की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। अन्य तीर्थ यात्रियों का पंजीकरण वैष्णवी धाम, पंचायत भवन रेलवे स्टेशन के पास और शालामार रोड स्थित महाजन हाल में किया जाएगा।

स्वास्थ्य जांच और पंजीकरण

पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान ही श्रद्धालुओं और साधु-संतों की मौके पर स्वास्थ्य जांच की जाएगी। स्वास्थ्य प्रमाण पत्र मिलने पर ही यात्रा का पंजीकरण होगा। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।

एडवांस और तत्काल पंजीकरण

दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहले ही एडवांस पंजीकरण करा चुके हैं। तत्काल पंजीकरण “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा। श्रद्धालुओं को सबसे पहले जम्मू रेलवे स्टेशन के पास सरस्वती धाम में पंजीकरण के लिए फार्म भरना होगा, जिसके आधार पर एक टोकन दिया जाएगा। इस टोकन के आधार पर अगले दिन पंजीकरण केंद्र पर जाकर यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

श्री अमरनाथ यात्रा मार्ग और कोटा

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड प्रतिदिन दोनों यात्रा मार्गों (पहलगाम और बालटाल) से अधिकतम 10-10 हजार श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति देता है। मौसम खराब होने की स्थिति में यह संख्या घटाई जा सकती है।

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