वर्तमान में भारत सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, निर्माण, और प्रौद्योगिकी के विकास का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव हैं और हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। आइए एक नजर डालते हैं सेमीकंडक्टर उद्योग और अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर।
सेमीकंडक्टर एक ऐसी सामग्री है जिसकी चालकता सुचालक और कुचालक के बीच होती है। ये शुद्ध तत्व जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम, या गैलियम आर्सेनाइड से बने होते हैं। आज, ये चिप्स समकालीन ऑटोमोबाइल, घरेलू गैजेट्स, और चिकित्सा उपकरणों का अभिन्न अंग हैं। कार, लैपटॉप, घरेलू उपकरण, स्मार्टफोन, और गेमिंग कंसोल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इनका व्यापक उपयोग होता है।
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भारत की तैयारी
सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण में मुख्य घटक सिलिकॉन होता है, जो ट्रांजिस्टर में उपयोग किया जाता है। इसके निर्माण में उच्च सटीकता की आवश्यकता होती है और इसके लिए उत्कृष्ट इंजीनियर्स की जरूरत होती है। भारत के लिए यह एक सकारात्मक अवसर है क्योंकि इस प्रकार के उद्योगों को बढ़ावा देने से भारतीय बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग देश में ही किया जा सकेगा।
सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग और भारत की भूमिका
हाल के वर्षों में ऑनलाइन गतिविधियों और अन्य डिजिटल संरचनाओं के बढ़ने से सेमीकंडक्टर की मांग में वृद्धि हुई है। वैश्विक कोरोनावायरस महामारी ने डिजिटलीकरण प्रक्रिया को गति दी है, जिससे भारत इस मांग को पूरा करने में सक्षम हो सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत तेजी से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार ने सेमीकंडक्टर वस्तुओं के निर्माण को प्रोत्साहित करने का सफल प्रयास किया है।
अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर
सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। औद्योगिक क्रांति 4.0 को भी बढ़ावा मिलेगा। सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक सूचना युग के लिए महत्वपूर्ण हैं और ये हमारे जीवन को सरल बनाते हैं। वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए भारत को मौजूदा क्षमताओं का उपयोग करते हुए पारितंत्र को बढ़ावा देना होगा। आज वक्त की मांग है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विद्यमान अवसरों का पूरा लाभ उठाया जाए।
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