अमित शाह ने पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की ‘अंतिम अरदास’ में भाग लिया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री शाह ने कहा,“ श्री प्रकाश सिंह बादल जी के हमारे बीच ना रहने से केवल पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति और सामाजिक नेतृत्व को अपूरणीय क्षति हुई है।
बादल जी के जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना बहुत मुश्किल होगा। बादल जी के जाने से सिख पंथ ने अपना एक सच्चा सिपाही, देश ने एक देशभक्त, किसानों ने अपना सच्चा हमदर्द और राजनीति ने उच्च मानांकों को सिद्ध करने वाले एक महापुरुष को खोया है।“
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 70 साल के लंबे सार्वजनिक जीवन के बाद व्यक्ति चला जाए और पीछे कोई विरोधी ना हो, ऐसा अजातशत्रु जैसा जीवन बादल साहब के सिवा कोई नहीं जी सकता था।”
उन्होंने कहा,“ हमेशा बादल जी से मिलकर कुछ ना कुछ सीखा, चेतना प्राप्त की और उन्होंने हमेशा सच्चा रास्ता दिखाने का प्रयास किया। इतनी पारदर्शिता के साथ राजनीतिक जीवन में सलाह देना एक महामानव के सिवा कोई नहीं कर सकता।“
श्री शाह ने कहा कि श्री बादल पंजाब विधानसभा में सबसे लंबे समय तक रहने वाले सदस्य थे। पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने नए पंजाब की नींव डालने का काम किया।
उनके जाने के साथ ही भाईचारे का सरदार चला गया। उन्होंने अपना पूरा जीवन हिंदू-सिख एकता के लिए समर्पित किया और राजनीति में कई विरोध झेलने के बावजूद सबको एकजुट रखने के लिए हमेशा प्रयासरत रहे।
सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में इस तरह का व्यक्ति मिलना असंभव है।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा,“ 1970 से लेकर आज तक जब भी देश के लिए खड़ा होने का मौका आया, बादल साहब कभी पीछे नहीं हटे।
सरदार प्रकाश सिंह बादल सार्वजनिक जीवन में लंबे समय जेल में रहकर सिद्धांतों और पंथ के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति थे।
आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए बादल साहब चट्टान की तरह खड़े रहे, कारगिल युद्ध हो या आतंक के खिलाफ लड़ाई हो, हर मोर्चे पर आसमान जितने ऊंचे व्यक्तित्व वाले बादल साहब हमेशा ढाल की तरह देशहित में खड़े नज़र आए।”
श्री शाह ने कहा कि श्री बादल का जाना पूरे देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा ,“ बादल जी के जीवन से हम सब प्रेरणा लें और उन्होंने जिस रास्ते पर चलने की सीख दी, वाहेगुरु हम सबको उस रास्ते पर चलने की शक्ति दें।”

