Friday, March 27, 2026

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि भारत के पास है सभी विचारों के साथ ‘सामंजस्य’ की अनूठी संस्कृति

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मुगल शहजादे दारा शिकोह के ‘मजमा उल बहरीन’ के अरबी संस्करण का विमोचन करने के बाद कहा कि मजमा – उल – बहरीन – ‘दो महासागरों का संगम’ ने धर्मों और भारत के लोगों के बीच मजबूत एकता लाने में मदद की.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि भारत के पास न केवल दूसरों के विचारों के लिए ‘सहिष्णुता’ की गौरवशाली विरासत है, बल्कि सभी विचारों के साथ ‘सामंजस्य’ की एक अनूठी संस्कृति है.

श्री धनखड़ ने शुक्रवार को यहां एक समारोह मे कहा कि भारतीय संस्कृति बहुलवाद और समन्वयवाद की संस्कृति है.

उन्होंने मुगल शहजादे दारा शिकोह के ‘मजमा उल बहरीन’ के अरबी संस्करण का विमोचन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मजमा – उल – बहरीन – ‘दो महासागरों का संगम’ ने धर्मों और भारत के लोगों के बीच मजबूत एकता लाने में मदद की.

उन्होंने कहा, “यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए हमेशा प्रासंगिक है.”

उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के दर्शन में विश्वास करता रहा है. हम वास्तव में मानते हैं कि दुनिया एक परिवार है. ‘सर्व धर्म समभाव’ भारत की आत्मा है.

भारतीय विचार और जीवन शैली में दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है. हम इस प्राचीन भूमि से ज्ञान के खजाने पर विचार कर सकते हैं और मानवता के लिए वैश्विक शांति के समय की शुरुआत कर सकते हैं.

दारा शिकोह को प्रतिभाशाली, कुशल कवि और संस्कृत के विद्वान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह सामाजिक सद्भाव और धार्मिक एकता के पथ प्रदर्शक थे.

इस पुस्तक ‘मजमा- उल – बहरीन में, दारा शिकोह ने एक एक करके हिंदू धर्म (वेदांत) और इस्लाम (सूफीवाद) के बीच सभी समानताओं को सूचीबद्ध किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इस्लाम और हिंदू धर्म के बीच का अंतर केवल मौखिक है.

श्री धनखड़ ने अपनी विरासत को पुनर्जीवित करने और वर्तमान समय में सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया.

पुस्तक के अनुवादक अमर हसन है और इसे आईसीसीआर ने प्रकाशित किया है.

इस अवसर पर आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष में एक गीत ‘अतुल्य भारत देश मेरा’ का भी विमोचन किया गया.

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