“महाराष्ट्र सियासी संकट” एकनाथ शिंदे वाली याचिकाओं में से एक में तर्क दिया गया कि चूंकि शिंदे गुट के पास 32 विधायक और बहुमत है इसलिए अयोग्यता याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है. इसमें आगे कहा गया कि विधायकों ने भी अपनी सदस्यता नहीं छोड़ी है.
नयी दिल्ली: महाराष्ट्र के ‘सियासी संकट’ से संबंधित ताजा विवाद उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया है. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष महाराष्ट्र सियासी संकट से संबंधित दो याचिकाएं सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं.
ये याचिकाएं ‘बागी’ खेमे का नेतृत्वकर्ता माने जाने वाले एकनाथ शिंदे और एक अन्य विधायक भरत गोगावाले द्वारा अलग-अलग दायर की गई हैं.
श्री शिंदे ने शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर अजय चौधरी की नियुक्ति और श्री गोगावाले ने महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष की ओर से शिवसेना के 16 ‘बागी’ विधायकों अयोग्य घोषित करने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है.
रविवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की खंडपीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया, जिन्होंने 27 जून को इस पर सुनवाई होने पर सहमति व्यक्त की.
इन दो याचिकाओं में से एक में तर्क दिया गया है कि चूंकि शिंदे गुट के पास 32 विधायक और बहुमत है इसलिए अयोग्यता याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है. इसमें आगे कहा गया कि विधायकों ने भी अपनी सदस्यता नहीं छोड़ी है.
याचिका में कहा गया कि नोटिस इसलिए भी पोषणीय नहीं है क्योंकि यह बहुमत के एक कदम को चुनौती देता था, जो पार्टी के नेता और बहुमत द्वारा चुने गए मुख्य सचेतक के दिशानिर्देश पर काम कर रहे थे.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि डिप्टी स्पीकर ने विधायकों को अयोग्यता नोटिस का जवाब देने के लिए आवश्यक सात दिन का समय नहीं दिया, बल्कि केवल 48 घंटे का वक्त दिया है, जो महाराष्ट्र विधान सभा के नियमों के खिलाफ है.
याचिका में अजय चौधरी के बारे में दावा किया गया है कि शिंदे समूह के विधायक भरत गोगावाले को अपने विधायक दल का नेता चुना है और उन्हें शिवसेना का विधायक दल का नेता घोषित किया जाना चाहिए.
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल की स्थिति 21 जून को तब पैदा हुई, जब बालासाहेब ठाकरे के वफादार एकनाथ अपने साथ कुछ विधायकों को लेकर मुंबई छोड़ पहले सूरत व इसके बाद असम के गुवाहाटी में एकांतवास में चले गए.

