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Wednesday, January 21, 2026

अफगानिस्तान के दौरे पर भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल

इंडियाअफगानिस्तान के दौरे पर भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान में मानवीय सहायता के वितरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा और भारतीय सहायता से चल रही परियोजनाओं के कार्यान्वयन स्थलों का दौरा करेगा.

भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल इन दिनों अफगानिस्तान की यात्रा पर गया है, जहां वह सभी वर्गों के स्थानीय लोगों को मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अलावा तालिबान के प्रतिनिधियों से चर्चा करेगा.

विदेश मंत्रालय ने आज यहां बताया कि भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान में मानवीय सहायता के वितरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा और देश में भारतीय सहायता से चल रही परियोजनाओं के कार्यान्वयन स्थलों का दौरा भी करेगा.

उल्लेखनीय है कि अफगान लोगों की मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत ने सहायता देने का फैसला किया था.

इस क्रम में भारत सरकार करीब 20 हजार टन गेहूं, 13 टन दवाइयां, पांच लाख डोज़ कोविड वैक्सीन और सर्दियों के कपड़े अफगानिस्तान भेजे हैं.

यह सामग्री काबुल स्थित इंदिरा गांधी बाल चिकित्सालय तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसियों विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं विश्व खाद्य कार्यक्रम को सौंपी गई थी.

विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं ईरान डिवीजन के प्रभारी संयुक्त सचिव जे. पी. सिंह की अगुवाई में काबुल में भारत से आने वाली मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था का जायजा लेने गया है.

इसके अलावा भी भारत और भी चिकित्सीय एवं खाद्य सामग्री भेजने की तैयारी कर रहा है.

भारत ने ईरान में रह रहे अफगान शरणार्थियों के लिए भारत निर्मित कोवैक्सिन के 10 लाख डोज़, 6 करोड़ पोलियो वैक्सीन और दो टन आवश्यक दवाएं भेंट की थी.

भारत की अफगानिस्तान के लोगों को इस सहायता की पूरे अफगान समाज में व्यापक सराहना हुई है.

इसी संदर्भ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सत्तारूढ़ तालिबान के वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेगा और अफगानिस्तान के लोगों को भारत की ओर से मानवीय सहायता के बारे में चर्चा करेगा.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के अफगानिस्तान के लोगों के साथ ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों तथा प्राचीन काल से चले आ रहे संपर्क की पृष्ठभूमि के अनुरूप ही भारत का रुख रहेगा.

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