रिपोर्ट में लिखा है कि पुलिस अधिकारियों ने बात करने से पहले साफ मना कर दिया था. वहां मौजूद एक लेडी पुलिसकर्मी ने धीरे से कहा, ‘मामला हाईप्रोफाइल है, कोई बात नहीं करेगा. ऊपर से ऑर्डर हैं, और अब तो CBI जांच भी चल रही है.’
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक दलित लड़की के साथ हुए गैंगरेप की कहानी को समाचार पत्र दैनिक भास्कर ने काफ़ी विस्तार से छपी है. दरअसल अखबार की टीम अपनी पहुँच उस थाने तक बना ली जहां लड़की के गैंगरेप के 6वें और मौत के 5वें दिन बाद FIR दर्ज हुई थी. लड़की का ताल्लुक़ मतुआ समुदाय से है जो दरअसल दलित समुदाय ही का एक सबकास्ट है.
रिपोर्ट में लिखा है कि पुलिस अधिकारियों ने बात करने से पहले साफ मना कर दिया था. वहां मौजूद एक लेडी पुलिसकर्मी ने धीरे से कहा, ‘मामला हाईप्रोफाइल है, कोई बात नहीं करेगा. ऊपर से ऑर्डर हैं, और अब तो CBI जांच भी चल रही है.’
रिकॉर्डिंग न हो सके इसलिए थाने में घुसते ही फोन स्विच ऑफ करवा दिया गया. थाने से बाहर पुलिस सूत्र की तलाश शुरू की तो जल्दी ही वह हाथ लगा. पहचान ज़ाहिर न होने का भरोसा दिलाने के बाद वह बात करने के लिए तैयार हुआ.
उसने साफ कहा, ‘बात करेंगे, लेकिन न थाने में न फोन पर.’ सूत्र ने आरोपी ब्रजो गवाली के पुलिस के पास दर्ज बयान से अपनी बात की शुरू की. उसने दर्ज बयान दिखाते हुए कहा-
‘ब्रजो गवाली ने माना कि उसने और उसके तीन दोस्तों ने सेक्सुअल एंजॉयमेंट किया, लेकिन जबरदस्ती नहीं, लड़की की सहमति से. एंजॉयमेंट के बाद लड़की बिल्कुल ठीक थी. ब्रजो ने उसे बस अड्डे तक छोड़ा भी था.’
तो क्या लड़की की मौत की वजह बहुत ज्यादा ब्लीडिंग नहीं? जवाब मिला- ‘ब्रजो ने अपने बयान में तो यही कहा. पुलिस सूत्र ने जो बताया उसके मुताबिक गैंगरेप होने के 3 दिन के भीतर ही तकरीबन जांच रिपोर्ट तैयार हो गई थी. ब्रजो के बयान की पड़ताल के बाद बनी रिपोर्ट से जो थ्योरी सामने आई वह बच्ची के परिवार की कहानी को झुठलाने के साथ आरोपी के अपराध को भी कम करती है.
बांग्लादेश बॉर्डर को छूने वाले बंगाल के नदिया जिले की 14 साल की दलित बच्ची के गैंगरेप के 8वें और मौत के 9वें दिन तक इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अपनी अलग थ्योरी तैयार कर चुकी थी.
ऑनर किलिंग पर पुलिस प्रशासन मुहर लगाने ही वाला था कि हाई कोर्ट के दखल के बाद मामला CBI के पास चला गया. भास्कर को पुलिस के एक टॉप सोर्स ने पुलिस इन्वेस्टिगेशन और उसके बाद लगभग तैयार हो चुकी जांच रिपोर्ट की तस्वीर को विस्तार से बताया. पढ़िए-
पुलिस सूत्र के मुताबिक रिपोर्ट में दर्ज आरोपी ब्रजो गवाली का बयान कुछ ऐसा है, ‘4 अप्रैल को मेरा बर्थडे था. मैंने लड़की को बताया था कि मैं और मेरे तीन दोस्त वहां रहेंगे. लड़की भी उन सबको जानती थी. हमने गैंगरेप नहीं किया, सेक्सुअल एंजॉयमेंट किया, जबरदस्ती नहीं बल्कि लड़की की सहमति से. जब सब कुछ हो गया तो मैं लड़की को उसके घर के करीब बस अड्डे तक छोड़ने गया. वह साइकिल से थी. उसके बाद उसे अकेले अपने घर तक जाना था. तब तक उसकी तबीयत ठीक थी.’
सूत्र ने बताया आरोपी के बयान के बाद पुलिस ने आगे की पड़ताल की तो बस अड्डे उस शाम पीड़ित लड़की को घर तक पहुंचाने वाले एक लड़के और एक लड़की का बयान दर्ज किया.
बयान कुछ इस तरह से था, ‘उस शाम बस अड्डे के पास की बस्ती में मौजूद लड़के ने बताया, ‘लड़की (पीड़िता) साइकिल से थी, लेकिन फिर वह साइकिल खड़ी कर एक चबूतरे पर बैठ गई. मैंने उसे पूछा बहन क्या हुआ? उसने कहा, सिर दर्द हो रहा है.
तुम मुझे घर तक छोड़ दो. मैं लड़का था आखिर कैसे छोड़ता, तभी हमारी जानने वाली एक लड़की दिखी मैंनै उससे कहा, तुम इसे घर तक छोड़ दो. अंधेरा हो रहा था, इसलिए मैंने और मेरे एक दोस्त ने बाइक से रोशनी दिखाई और वह लड़की उसे (पीड़िता) को साइकिल पर बिठाकर छोड़ने गई.’
उसने आगे बताया, ‘हमने उस लड़की को उसकी मां के पास घर पर छोड़ा. हमने उन्हें बताया कि बहन की तबीयत कुछ ठीक नहीं है. उसके बाद हम वापस आ गए.’
रिपोर्ट में कहीं नहीं दर्ज खून बहने की बात
सूत्र ने बताया, पुलिस रिपोर्ट में यह बिल्कुल भी दर्ज नहीं है कि बच्ची का खून बह रहा था या कपड़ों में खून के धब्बे भी थे. हां, सिर दर्द की बात जरूर दर्ज है.
पुलिस सूत्र से हमने पूछा कि मौत की पड़ताल कहां तक पहुंची थी? उसने बताया, FIR दर्ज होते ही हम लड़की के घर पहुंचे थे, सबूतों की पड़ताल करने. वहां पहले से ही BJP विधायक आशीष विश्वास और मुकुट मनी अधिकारी मौजूद थे.
हमने लड़की की खून लगी चादर लेनी चाही तो विधायकों ने देने से मना कर दिया. बड़ी मशक्कत के बाद हमने चादर का एक टुकड़ा लिया. सूत्र ने इस बात के साफ संकेत दिए कि रिपोर्ट ऑनर किलिंग के एंगल की तरफ भी इशारा करती है, हालांकि अभी तक यह स्पष्ट तौर पर यह लिखा नहीं गया था.
सूत्र ने यह भी साफ कहा कि मौत के बाद जब पुलिस सुबूत इकट्ठा करने पहुंची तो वहां भाजपा के दो विधायकों की इतनी सुबह मौजूदगी भी शक के दायर में है. रिपोर्ट में यह बात भी दर्ज है.
खून लगी चादर के बाद श्मशान से पुलिस ने लड़की के शव की राख से हड्डी भी बतौर सुबूत ली. तो क्या इन सब सबूतों की कोई जांच हुई? सूत्र ने कहा, ‘सब फोरेंसिक लैब में भेजे जाने थे. लेकिन उससे पहले ही जांच CBI के हाथ में चली गई.’
अब सारे सबूत CBI के पास हैं. उधर, पुलिस की जांच मृत बच्ची के परिवार के द्वारा सुनाई गई आपबीती को झुठलाती है.
साफ है, इस मामले में CBI की एंट्री न होती तो बच्ची के परिवार की आपबीती का एंगल शायद इस केस में होता ही नहीं. पुलिस की पड़ताल इस तरफ इशारा करती है कि रेप तो हुआ, (हां आरोपी भले ही यह कहे कि सहमति से हुआ, लेकिन नाबालिग के साथ संबंध बनाना रेप ही होता है, सहमति का कोई कानूनी आधार है नहीं.)
लेकिन मौत की वजह वह गैंगरेप नहीं. पुलिस सूत्र ने यह भी बताया कि मां-बाप के बयान के हवाले से यह भी पड़ताल में सामने आया कि मृत बच्ची की मां ने लोकल डॉक्टर से पीरियड के दौरान होने वाले पेट दर्द की दवा भी ली थी.
अगर हालत गंभीर नहीं थी तो मौत कैसे हुई? सूत्र ने धीरे से कहा, ‘क्या पता मां- बाप को अफेयर या इस सेक्सुअल रिलेशन का पता चल गया हो और उन्होंने ऑनर किलिंग कर दी हो!
सूत्र ने स्पष्ट करते हुए कहा, ‘हालांकि पुलिस की रिपोर्ट में ये दर्ज नहीं है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी नहीं दर्ज है कि मौत हाई ब्लीडिंग की वजह से हुई!’
तीसरी थ्योरी- गैंगरेप के बाद हाई ब्लीडिंग, इलाज न मिलने से हुई मौत
मां-बाप और परिवार वालों की जुबानी जब इस पूरे प्रकरण को जानने के लिए दिल्ली से करीब 1600 किलोमीटर दूर जब भास्कर की टीम पहुंची तो बच्ची के ताऊ ने साफ कहा, ‘आखिरी सांस लेने से ठीक पहले लड़की ने मां को बताया उसके साथ रेप हुआ है.
उसने खुलकर आरोपी का नाम भी लिया. ब्लीडिंग की वजह से बेहाल लड़की को आरोपी के घर वाले छोड़ने आए. बात खुले नहीं, इसके लिए अस्पताल जाने पर झोपड़ी और हम लोगों को जिंदा जलाने की धमकी भी आरोपी के परिवार के लोगों ने दी. गैंगरेप, हाई ब्लीडिंग और धमकी ने बच्ची की जान ले ली.
करीब 12 घंटे तड़पने के बाद लड़की ने दम तोड़ दिया. दबंगों ने न केवल अस्पताल न ले जाने के लिए दबाव बनाया, बल्कि बिना पोस्टमॉर्टम बच्ची का अंतिम संस्कार जल्दी से जल्दी करने का दबाव डाला. ऐसा न करने पर हमें मुसीबत में डालने की धमकी भी दी.’
