राज्यसभा ने चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कॉस्ट एकाउंटेंट्स तथा कंपनी सचिव संस्थान में सुधार लाने के प्रावधानों वाले ‘चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कॉस्ट और वर्क्स एकाउंटेंट्स तथा कंपनी सचिव विधेयक 2022 को पारित कर दिया.
नयी दिल्ली: राज्यसभा ने मंगलवार को चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान, भारतीय कॉस्ट एकाउंटेंट्स संस्थान तथा भारतीय कंपनी सचिव संस्थान में सुधार लाने के प्रावधानों वाले ‘चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कॉस्ट और वर्क्स एकाउंटेंट्स तथा कंपनी सचिव (संशोधन) विधेयक 2022’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया. इसके साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गयी.
लोकसभा ने इसे 30 मार्च को पारित कर दिया था.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए कि इन संशोधनों के माध्यम से तीनों संस्थाओं चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कॉस्ट और वर्क्स एकाउंटेंट्स तथा कंपनी सचिव के पेशों के विनियमन और सुधार का लक्ष्य है.
इससे इन पेशों के लिए स्थापित अनुशासन तंत्र को मजबूती मिलेगी और इन पेशों के सदस्यों के खिलाफ मामलों का समयबद्ध निपटान हो सकेगा.
उन्होंने कहा कि इस विधेयक में बदलाव विभिन्न समितियों के सुझाव के आधार पर किया गया है.
विधेयक के माध्यम से लेखाकारों एवं कंपनी सचिवों पर शिकंजा कसने की आशंका गलत है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का मकसद किसी तरह से इन तीनों पेशों से जुड़ी किसी भी व्यवस्था को बदलना नहीं, बल्कि उसे मजबूती प्रदान करना है.
वित्त मंत्री ने कहा कि इन तीनों कानूनों के एक मंच पर आने से आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी और इनके बीच परस्पर समन्वय संबंधी परिषद या अन्य समितियों में विश्व स्तर के विशेषज्ञ सदस्य होंगे.
उन्होंने कहा कि समिति में विशेषज्ञ होंगे और समिति स्वायत्त रूप से काम करेगी.
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इस समिति में दो सदस्य स्वतंत्र होंगे जिनका चयन परिषद करेगी जबकि दो सदस्यों का चुनाव सरकार की तरफ से किया जाएगा.
काॅस्ट एकाउंटेंट तथा कंपनी सचिव की स्थिति में भी इसी तरह से सुधार किए जाएंगे.
इसमें तीनों संस्थानों के लिए एक समन्वय समिति होगी, जिसमें एक अध्यक्ष तथा एक उपाध्यक्ष होगा.
समन्वय समित का मकसद तीनों संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना है.
उन्होंने कहा कि संसदीय समिति ने 2005 में इन संस्थाओं को लेकर जो सुझाव दिये थे.
उनको इन विधेयकों के माध्यम से लागू करने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि परिषद को अपना ऑडिटर नियुक्त करने का अधिकार है, लेकिन सीएजी संवैधानिक संस्था है, इसलिए ऑडिटर की नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय उसी के नियमों के हिसाब से होगा.
वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया है.
इसके साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गयी.
इस विधेयक के माध्यम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स अधिनियम 1949, कॉस्ट और वर्क्स एकाउंटेंट्स अधिनियम 1959 और कंपनी सचिव अधिनियम 1980 में संशोधन किया गया है.

