बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद ने 5 भूमिहार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. नतीजा सामने आया तो इनमें 3 प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई
बिहार एमएलसी चुनाव में दूसरे चुनाव जैसा धर्म, जाती, यहाँ तक कि पार्टी पॉलिटिक्स का समीकरण तक बहुत कम नज़र आया. जहाँ किशनगंज पूर्णिया अररिया के मुस्लिम बहुल इलाक़े में भाजपा प्रत्याशी दिलीप जैसवाल को जीत हासिल हुई वहीं राजद जिसे आज भी कहीं न कहीं मुस्लिम और यादव (MY) समीकरण वाली पार्टी के नज़रिए से देखा जाता है, अब जबकि आरजेडी की कमान तेजस्वी यादव के हाथों में मिली तो अब पार्टी को वो इस चोले से बाहर निकालने में लग गए हैं. तेजस्वी यादव लगातार अब खुलकर राजद को MY नहीं बल्कि ए टू ज़ेड की पार्टी बताते हैं.
विधान परिषद चुनाव में उन्होंने खुलकर एक प्रयोग किया जिससे बड़ा संदेश भी बाहर निकला. सवर्ण समाज व वोटरों को साधने में जुटी राजद ने इस बार खासकर भूमिहार उम्मीदवारों पर दांव खेला था. और अब बोचहां उपचुनाव में भी तेजस्वी यादव सवर्ण वोटरों को साधने में लग गये हैं.
बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद ने 5 भूमिहार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. नतीजा सामने आया तो इनमें 3 प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई. पटना से कार्तिकेय कुमार ने जीत दर्ज की. कार्तिकेय कुमार को खुद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उम्मीदवार घोषित किया था. मुंगेर से अजय सिंह तो पश्विमी चंपारण से ई सौरभ कुमार राजद के टिकट पर जीते हुए भूमिहार प्रत्याशी रहे.
मुज़फ्फरपुर से राजद उम्मीदवार की हार
विधान परिषद चुनाव के दौरान प्रचार के लिए जब तेजस्वी मुज़फ्फरपुर गए थे तो उन्होंने खुलकर कहा था कि राजद ए टू ज़ेड की पार्टी है ना कि M.Y. समीकरण वाली o. कहा था कि हमने तो हाथ आगे बढ़ा दिया है. अब आपकी बारी है. हमको अपना बनाते हुए चार कदम आगे बढ़ाइये. तेजस्वी यहां एमएलसी उम्मीदवार शंभु सिंह को जीत दिलाने के लिए सभा कर रहे थे. हालांकि यहां से राजद उम्मीदवार की हार हुई.
उधर एमएलसी चुनाव में पूर्णिया अररिया किशनगंज विधान परिषद क्षेत्र से एनडीए और बीजेपी के उम्मीदवार डॉ दिलीप जायसवाल ने जीत दर्ज की है जहाँ ग़ैर भाजपा वॉटर्स की अकसरियत है. दिलीप जायसवाल लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं. उन्हें 7 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले जो 80 फीसदी से भी अधिक हैं. बताया जाता है कि विधान परिषद चुनाव में पैसे का जमकर खेल होता है और पैसों ही से वोटरों को खरीदा जाता है और पैसे ही किसी उम्मीदवार की जीत तय करते हैं.

