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Wednesday, January 21, 2026

प्राकृतिक ईंधन कीमत नियंत्रण की स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण मांग वाली याचिका खारिज

अर्थव्यवस्थाप्राकृतिक ईंधन कीमत नियंत्रण की स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण मांग वाली याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट प्राकृतिक ईंधन कीमत नियंत्रण करने के लक्ष्य से स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी.

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने प्राकृतिक ईंधन की कीमतें नियंत्रित करने के उद्देश्य से एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण बनाने की मांग वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी.

न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र को एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण बनाने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई थी.

शीर्ष अदालत ने हालांकि केएसआरटीसी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अनुमति दे दी.

केंद्र की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा थोक खरीदारों को खुदरा बाजार दर से अधिक कीमत पर डीजल बेचने के फैसले से परेशान केएसआरटीसी ने कीमतों को नियंत्रित करने की उम्मीद में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

याचिका में थोक खरीदारों के लिए डीजल की कीमत में वृद्धि के तेल विपणन कंपनियों के एक फरवरी के फैसले को “स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण, मनमाना और अनुचित” करार दिया गया है.

केएसआरटीसी का कहना है कि इस फैसले से उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा.

इस फैसले से पहले से ही साल दर साल वित्तीय संकट का सामना कर रही केएसआरटीसी के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

याचिका में कहा गया है कि केएसआरटीसी यदि खुदरा डीलरों से डीजल खरीदने का विकल्प चुनती है तो उसे तेल विपणन कंपनियों द्वारा 97.88 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले 93.47 रुपये प्रति लीटर ही भुगतान करना होगा.

इस नजरिए से देखा जाए तो यह “भेदभाव पूरी तरह से अतार्किक है.”

केएसआरटीसी का कहना है कि उसकी डीजल की औसत खपत लगभग 4.10 लाख लीटर प्रति दिन है.

इस प्रकार से तेल विपणन कंपनियों के ‘भेदभाव पूर्ण’ फैसले से उसे लगभग 19 लाख रुपये का अनुमानित नुकसान होगा.

पीठ ने याचिका पर आगे विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि केरल के पास बहुत पैसा है, क्योंकि यह एकमात्र राज्य है जिसने दो साल से कार्यरत मंत्रियों के निजी कर्मचारियों को आजीवन पेंशन का भुगतान किया है.

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