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Wednesday, January 21, 2026

विमान ईंधन के दामों में बढ़ोतरी, एयरलाइनों ने एटीएफ को जीएसटी में लाने की मांग की

अर्थव्यवस्थाविमान ईंधन के दामों में बढ़ोतरी, एयरलाइनों ने एटीएफ को जीएसटी में लाने की मांग की

विमान ईंधन के दामों में बढ़ोतरी से एयरलाइनों के खर्चे में भारी वृद्धि हुयी है और वे एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रही हैं ताकि उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल सकें.

नयी दिल्ली: देश में विमान ईंधन की दामों में इस साल छठी बार बुधवार को 18 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ दिल्ली में 1,10,666 रुपए प्रति किलो लीटर (प्रति 1000 लीटर) के स्तर पर पहुंच गयी है, जो कि एक नया रिकॉर्ड है.

विमान ईंधन महंगा होने से एयरलाइनों के खर्चे में भारी वृद्धि हुयी है और वे सरकार से विमान ईधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रही हैं ताकि उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल सकें.

सरकारी तेल कंपनियों ने दिल्ली में पाछिक समीक्षा में एटीएफ का मूल्य राजधानी में 18.3 प्रतिशत (17135.63 रुपए प्रति किलो लीटर) बढ़ा दिया है, इससे इसका भाव 1,10,666.29 रुपए प्रति किलो लीटर हो गया है.

यूक्रेन संकट के बीच वैश्विक तेल बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के चलते तेल कंपनियां एटीएफ का दाम बढ़ाने पर विवश हुयी हैं.

गौरतलब है कि पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 147 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया था.

परंतु इस समय कीमतें शांत होकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नजदीक आ गयी हैं.

निजी क्षेत्र की एयरलाइन इंडिगो के पूर्णकालिक निदेशक एवं सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने एक बयान में कहा कि पिछले कुछ सप्ताह से यूरोप में लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर सात साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं और ये 140 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं.

इससे जनवरी, 2022 से अब तक एटीएफ की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है.

विमानन सेवा कंपनियों की परिचालन लागत में 45 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा एटीएफ का होता है.

श्री दत्ता ने कहा, “हम सरकार से बातचीत करते रहे हैं कि एटीएफ को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए क्योंकि इससे इनपुट टैक्स का लाभ होने लगेगा.”

उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि एटीएफ को जीएसटी में लाने की जरूरत इस समय सबसे अधिक है. ताकि एयरलाइनों की परिचालन लागत की वृद्धि को कुछ कम किया जा सके और एयरलाइनों के लिए उड़ानों का परिचालन व्यवहारिक बनाया जा सके और उपभोक्ताओं को उचित दर पर सेवाएं मिल सके.”

इंडिगो के सीईओ श्री दत्ता ने कहा कि करों को तर्कसंगत बनाने से विमानन क्षेत्र की वृद्धि होगी और इसका अर्थव्यवस्था पर अनुकूल असर पड़ेगा.

इससे व्यापार, पर्यावरण और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा.

इंडिगो देश में सबसे तेजी से बढ़ रही सस्ती सेवा देने वाली एयरलाइन है.

इसके बेड़े में 275 से अधिक विमान हैं और देश-विदेश के मार्गों पर हर रोज 1,500 से अधिक उड़ानों का परिचालन करती है.

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