मुसलमानों के ज़रिए राम के बारे में इस तरह का बयान नया नहीं है. अल्लामा इक़बाल ने राम के नाम एक नज़्म ‘एमाम-ए-हिंद राम’ लिखा था, जिसमे शायर-ए-मशरिक़ ने अपनी नज़्म में राम की कल्पना इमाम से की थी
यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अशफाक़ डब्लू ने एक बयान देकर सुर्खियां हासिल करने में कामयाब होगया है. अशफाक़ डब्लू कहा है कि मुस्लिम समाज के लोग भी श्री रामचंद्र जी के वंशज हैं. ऐसे में उनके इस बयान से समाजवादी पार्टी की चिंता बढ़ गई है. उनके इस बयान ने सपा के साथ साथ आम लोगों को भी चौंका दिया है.
यूपी विधानसभा चुनाव के 3 चरण पूरे हो गए हैं, वहीं चौथा चरण की वोटिंग 23 फरवरी को होने वाला है. दरअसल, रविवार शाम को समाजवादी पार्टी के शहर उत्तरी के उम्मीदवार ने अपने चुनावी दफ्तर का उद्घाटन किया करने के दौरान मीडिया से भी बात की. इस बातचीत में उन्होंने बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया.
अशफाक़ डब्लू ने कहा कि हम मुस्लिम हैं तो क्या हम हिंदुस्तानी नही हैं? आप कहते हैं जय श्रीराम. हम भी भगवान राम के वंशज हैं.
इस पर अयोध्या से वाराणसी पहुंचें छावनी परिषद के पीठधीश्वर स्वामी परमहंस ने अपना प्रतिक्रीया देते हुए कहा है कि राम के अस्तित्व को अगर किसी ने स्वीकार किया है तो अच्छी बात है. लेकिन जो राम भक्तों पर गोलियां चलाने वाला राम के अस्तित्व को कैसे मान लेता. यदि वो राम के वंशज हैं तो उन्हें सपा में शामिल होना ही नहीं चाहिए था. ये बयान सिर्फ वोट के लिए हैं.
हालांकि मुसलमानों द्वारा राम के बारे में इस तरह का बयान कोई नई बात नहीं है. उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा इक़बाल ने राम के नाम एक नज़्म ‘एमाम-ए-हिंद राम’ लिखकर गंगा-जमुनी तहज़ीब का परिचय दिया था. शायर-ए-मशरिक़ ने अपनी नज़्म में राम की कल्पना इमाम से की है.
1908 में शायर-ए-मशरिक़ की लिखी नज़्म प्रसिद्ध संग्रह ‘बांग-ए-दरा’ में शामिल है, जिसमें अल्लामा इक़बाल पूर्वाग्रह के पर्दे से हटकर राम के बारे में लोगों को एक अहम पैग़ाम दिया हैं. उन्होंने राम के व्यक्तिव को बताने के लिए अहले नज़र और इमाम जैसे शब्दों का सहारा लिया है.
अहले नज़र एक उर्दू मुहावरा है जिसका मतलब है गहराई से अंतर्दृष्टि. यानि अहले नज़र से इक़बाल कि मुराद आंखों की नज़र नहीं बल्कि रूहानी नज़र है. रूहानी नज़र वाला व्यक्ति ही सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने, समझने की ताक़त रखता है.
वक़्त के धारे के आगे उसकी बात अटल होती है. फिर उन्होंने राम को इमाम से भी मुखातिब किया है. इमाम का अर्थ होता है नेतृत्वकर्ता लेकिन इक़बाल की नज़र में इमाम का अर्थ बहुत ऊंचा है. उनका मतलब एक ऐसा शख्स जो लोगों को सही रास्ता दिखाए. उन्हें अंधेरे रास्ते की भूलभुलैयों से निकालकर रोशनी की तरफ लाए. इक़बाल की नज़र में राम एक ऐसे नेतृत्वकर्ता हैं जो लोगों को नेकी और सच्चाई का रास्ता देखाते हैं.
इक़बाल अपनी किताब ‘बांग-ए-दरा’ में अपनी नज़्म ‘एमाम-ए-हिंद राम’ लिखते हुए कहते हैं:
इस देश में हुए हैं हज़ारों मलक सरिश्त
मशहूर जिन के दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद
है राम के वजूद पे हिन्दुस्तां को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उसको इमाम-ए-हिंद

