Friday, March 13, 2026

यूपी में जन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, प्रत्याशी सूची में 50 महिलाओं के नाम शामिल

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कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी ने 125 उम्मीदवारों की  सूची में 50 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है, और सकारात्मक जन मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे.

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिलाओं पर अत्याचार, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे सकारात्मक मुद्दे उठाकर चुनाव प्रचार करने का ऐलान करते हुए गुरुवार को 125 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जिसमें 40 फीसदी महिलाओं को प्रत्याशी बनाकर महिला अत्याचारों के विरुद्ध नयी रणनीति के साथ चुनाव लड़ने की घोषणा की.

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी ने 125 उम्मीदवारों की पहली सूची में 50 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है.

महिला प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाई गई सभी महिलाएं संघर्ष करने वाली हैं.

उन्होंने कहा कि बड़ी बात यह है कि कांग्रेस ने उन्नाव मे बलात्कार पीड़ित युवती की मां आशा देवी को टिकट दिया है.

उन्होंने कहा कि उनका मकसद सत्ता के दम पर अत्याचार के शिकार हुए लोगों के हाथों में सत्ता देकर अत्याचार के खिलाफ खड़ा होने की ताक़त देना है और उनकी पार्टी इस काम में हर पीड़ित नागरिक की पूरी मदद करेगी.

श्रीमती वाड्रा ने कहा कि वह सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है और इस काम में प्रदेश की आधी आबादी को मजबूती प्रदान कर रही है.

इसके लिए उन्होंने चुनाव में ज्यादा से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट देने का निर्णय लिया.

इसी का परिणाम है कि पहली सूची में 40 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया गया है.

उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऊर्जावान और सशक्त बनाने के लिए उन्होंने जो कदम उठाए हैं, वे सफल हो रहे हैं और उसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महिलाओं का सम्मेलन करना पड़ा, उत्तर प्रदेश सरकार को महिलाओं की बेहतरी के लिए घोषणा करनी पड़ी, समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी महिला सम्मेलनों का आयोजन कर रही है.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को उन्होंने जो तरजीह दी है, उसकी वजह से महिलाएं सशक्त हो रही हैं और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई हैं.

अब कोई राजनीतिक दल चुनाव में महिलाओं की अनदेखी नहीं कर सकता। यही उनके संघर्ष की सबसे बड़ी सफलता है.

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