1947 में आजाद होने के बाद भारत ने वर्ष 1949 रेलवे के विकास के लिए विश्व बैंक से पहला ऋण लिया था.
नयी दिल्ली: विश्व बैंक ने भारत के साथ अपने 75 वर्ष के रिश्तों का उल्लेख करते हुये आज कहा कि इन वर्षाें में भारत ने उल्लेखनीय मुकाम हासिल करते हुये ऋण लेने वाले देश की टैग से मुक्त होकर अब दान देने वाला देश बन गया है.
विश्व बैंक ने कहा कि भारत के साथ उसकी भागीदारी के भी 75 वर्ष हो चुके हैं.
As @WorldBank completes 75 years of partnership with #India, we look back through the decades at some iconic landmarks along India’s development journey in which we were privileged to take part: https://t.co/Unv4m6LVpb Like | Share | Comment #75YrsofWorldBankandIndia #RepublicDay pic.twitter.com/AGJrrXFnGP
— World Bank India (@WorldBankIndia) January 26, 2022
वर्ष 1947 में आजादी के बाद भारत अल्प आय राष्ट्र ने निकलकर कम मध्यम आय वाला देश बन गया है और यहां की आबादी अभी 1.3 अरब है और तीन लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था है.
इस दौरान भारत ऋण लेने वाले देश से मुक्त होकर दान देने वाला देश बना है.
इस मौके पर विश्व बैंक के कंट्री निदेशक जुनैद अहमद ने उन छह लोगों से बात की है जिन्होंने भारत में सुधार को गति देने में महत्ती भूमिका निभाई है.
इन दौरान उन्होंने उन लोगों से भारत के विकास में विश्व बैंक की भूमिका और उसके साथ भारत के अनुभव पर चर्चा की जिसको दुनिया के दूसरे देशों के साथ साझा किया जा सके.
भारत जब ब्रिटिश उपनिवेश था तभी वर्ष 1945 में विश्व बैंक के संस्थापक सदस्य बना था.
बाद में भारत ने ही सुझाव दिया था कि विकासशील देशों के लिए एक विशेष संगठन बनाया जाना चाहिए और बाद में इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसियेशन का गठन किया गया था.
वर्ष 1947 में आजाद होने के बाद भारत ने वर्ष 1949 रेलवे के विकास के लिए विश्व बैंक से पहला ऋण लिया था.
विश्व बैंक का किसी एशियाई देशों का भी यह पहला ऋण था. इसी के साथ विश्व बैंक के साथ ऋण करार पर हस्ताक्षर करने वाली विजय लक्ष्मी पंडित पहली महिला भी बनी थी.
श्री अहमद ने जिन लोगों से चर्चा की है उनमें योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया, 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह, कौशल विकास एवं उद्यमशिलता मंत्रालय के पूर्व सचिव के पी कृष्णन, आंध्र प्रदेश सरकार के कृषि एवं सहकारिता सलाहकार टी विजय कुमार, पंजाब की पूर्व मुख्य सचिव विनि महाजन और गैर सरकारी संगठन सेवा की कार्यकारी निदेशक रीमा नानावटी शामिल हैं.

