महाराष्ट्र सरकार ने चुनाव से पहले एक अध्यादेश द्वारा ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था जिस पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है.
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों के चुनाव में अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के लिए राज्य सरकार के अध्यादेश के जरिये 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर सोमवार को रोक लगा दी.
महाराष्ट्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिये ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था.
चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख सात दिसंबर है.
न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार ने अपने आदेश में कहा कि आरक्षण के मामले में आयोग के गठन और स्थानीय स्तर की ‘सरकार’ में प्रतिनिधित्व संबंधी आंकड़े जुटाए बिना ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती.
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों के चुनाव में ओबीसी आरक्षण वास्ते अध्यादेश लाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को किया अस्वीकार।#Maharashtra #SupremeCourt https://t.co/fR2052chWh
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) December 6, 2021
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने राज्य सरकार के अध्यादेश के आधार पर स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिसे एक जनहित याचिका के माध्यम से शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी.
सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ओबीसी आरक्षण के प्रावधानों के आधार पर स्थानीय निकायों की चुनाव की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकती.
राज्य सरकार ने सितंबर में एक अध्यादेश के जरिये महाराष्ट्र जिला परिषद एवं पंचायत समिति अधिनियम -1961 और जिला परिषदों, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के लिए महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम में संशोधन किया था.
इस संशोधन के जरिये ओबीसी के लिए 27 फीसदी सीटें आरक्षण का प्रावधान किया गया था.
