केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिरिजू ने लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशो पेंशन राशि (वेतन एवं सेवा शर्त) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया.
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली पेंशन के साथ एक निश्चित आयुसीमा पार करने पर मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन राशि की सुविधा प्रदान करने वाला विधेयक आज लोकसभा में पेश किया गया.
केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिरिजू ने आज यहां लोकसभा में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) संशोधन विधेयक, 2021 को पेश किया.
श्री रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पेंशन सुविधा में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है और वह चर्चा के बाद उत्तर में अपनी बात कहेंगे.
कांग्रेस के शशि थरूर ने चर्चा आरंभ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन करती है.
साथ ही उन्होंने जनहित से जुड़े मुद्दों पर इन ऊंची अदालतों के रवैये पर निशाना भी साधा.
उन्होंने विभिन्न उदाहरण देकर कहा कि न्यायाधीश पूर्वाग्रह या राजनीतिक आग्रहों के आधार पर मनमानी करते हैं.
उन्होंने यह भी पूछा कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयुसीमा 62 से बढ़ा कर 65 करने और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की आयुसीमा 68 वर्ष करने के बारे में सरकार क्या करने वाली है.
श्री थरूर ने अयोध्या एवं कुछ अन्य विवादित मामलों में न्यायाधीशों की भूमिका पर टिप्पणी की तो संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने आपत्ति की.
सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच कुछ क्षणों तक नाेंकझोंक भी हुई.
सत्ता पक्ष की ओर से श्री पी पी चौधरी ने कहा कि सेवाशर्तों में बदलाव भी न्यायिक सुधारों का अंग है.
उन्होंने कहा कि न्यायिक सुधार केवल रिक्त स्थान पर भर्ती करने से ही संबंधित नहीं है.
उन्होंने न्यायाधीशों के चयन को लेकर बनी कॉलेजियम प्रणाली को लेकर भी टिप्पणी की.
उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जोसेफ कुरियन के हवाले से कहा कि यह कॉलेजियम की प्रणाली अपारदर्शी एवं जवाबदेही रहित है.
उन्होंने न्यायिक क्षेत्र में अवसंरचनात्मक सुधारों के बारे में भी बात की.
विधेयक में उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) अधिनियम, 1954 और सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्त) अधिनियम, 1958 में सुधार करने का प्रस्ताव किया गया है.
ये कानून भारत के उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और सेवा की शर्तों का नियमन करते हैं.
इन कानूनों के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के सभी सेवानिवृत्त न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्य पेंशन या पारिवारिक पेंशन के हकदार होते हैं.
उन्हें एक निर्दिष्ट पैमाने के अनुसार एक निश्चित आयु प्राप्त करने पर पेंशन या पारिवारिक पेंशन की अतिरिक्त राशि भी मिलती है.
इस पैमाने में पांच आयु वर्ग हैं (न्यूनतम 80, 85, 90, 95 और 100 वर्ष) और आयु के साथ पेंशन या पारिवारिक पेंशन की राशि में 20 से 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त राशि बढ़ती जाती है.

