न्यायमूर्ति एन. वी. रमना ने इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज़म के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से ये मीडिया से गायब हो रही है.
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना ने खोजी पत्रकारिता यानि इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज़म के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि मंदभाग्य से ये मीडिया से वंचित हो रही है.
न्यायमूर्ति रमना ने वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर रेड्डी उडुमुला की लिखी गई किताब ‘ब्लड सैंडर्स : द ग्रेड फॉरेस्ट हीस्ट’ के विमोचन के मौक़े पर पत्रकारिता के संदर्भ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया.
न्यायमूर्ति रमना ने महात्मा गांधी के इन उद्धरणों का उल्लेख किया- “समाचार पत्रों को सत्य के अध्ययन के लिए पढ़ा जाना चाहिए. उन्हें स्वतंत्र सोच की आदत को खत्म करने की अनुमति कतयी नहीं दी जानी चाहिए.”
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि मीडिया महात्मा गांधी के इन विचारों की रोशनी में आत्मनिरीक्षण कर खुद को परखेगा.”
शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश ने वन पारिस्थितिकी तंत्र (forest ecosystem) के संरक्षण पर आधारित इस किताब के लिए इसके लेखक श्री उडुमुला की सराहना की और सलाह देते हुए कहा कि अगर इस प्रयास में स्थानीय लोग भी शामिल हो जायें तो एक बड़ा बदलाव आएगा.

