इस्लामपुर पहले से ही एक पुलिस ज़िला है जहां एक पुलिस अधीक्षक भी नियुक्त है. एआईएमआईएम पहले से ही इस पर काफ़ी एतराज़ जताते रहे हैं कि मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में सिर्फ पुलिस थाने दिए जाते हैं, अन्य सुविधाएं नहीं दी जातीं.
उत्तर दिनाजपुर: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस विधायक अब्दुल करीम चौधरी की इस मांग को खारिज कर दिया कि इस्लामपुर जिसकी वो प्रतिनिधित्व करते हैं उसको उत्तर दिनाजपुर से अलग कर एक अलग ज़िला बनाया जाए. ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से मांग को खारिज कर दिया.
ज़ाहिर तौर पर नाराज़ ममता बनर्जी ने अब्दुल करीम साहब के रवैये को ‘घटिया’ क़रार देते हुए विधायक जी को लोगों के लिए काम करने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा.
उन्होंने कहा, “आप देख लीजिए वह इलाका कितना बड़ा है. आप चुनाव जीत गए हैं, अब लोगों के लिए काम करें. यह (अलग इस्लामपुर जिला) नहीं हो सकता.”
वह आगे कहती हैं कि “अगर विधायकों को लगता है कि वे जो चाहें बोलेंगे, तो मैं विधायकों को बोलने नहीं दूंगी..वे मुझे अपने घर में एक ज़िला बनाने के लिए कहेंगे.”
हैरानी की बात यह है कि उन्होंने कहा कि अगर जनप्रतिनिधियों को बोलने दिया जाता है, तो वे ऐसा ही बोलते हैं। हालांकि, जनप्रतिनिधि उन लोगों के लिए बोलने के लिए ही होते हैं जिनकी वे प्रतिनिधित्व करते हैं.
गौरतलब है कि 10वीं बार चुने गए विधायक अब्दुल करीम चौधरी वरिष्ठ राजनीतिक नेता हैं और टीएमसी के संस्थापक सदस्य बताए जाते हैं.
ममता के चौधरी साहब के साथ इस रवैये के बाद उनके क्षेत्र के लोगों ने सोशल मीडिया पर काफी गुस्सा और नाराज़गी देखाई है.
दिलचस्प बात यह है कि इस्लामपुर पहले से ही एक पुलिस ज़िला है जहां एक पुलिस अधीक्षक भी नियुक्त है.
एआईएमआईएम पहले से ही इस पर काफ़ी एतराज़ जताते रहे हैं कि मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में सिर्फ पुलिस थाने दिए जाते हैं, अन्य सुविधाएं नहीं दी जातीं.
