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Friday, January 23, 2026

मध्यप्रदेश में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ‘स्वामित्व योजना’ की शुरूआत की: मोदी

इंडियामध्यप्रदेश में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 'स्वामित्व योजना' की शुरूआत की: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से, जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद रहकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ‘स्वामित्व योजना’ मे शामिल हुए।

भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ग्रामीण इलाकों में संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ की शुरूआत वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की।

श्री मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दिल्ली से जुड़े, जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद रहकर वर्चुअल तरीके से शामिल हुए।

आज 19 जिलों के लगभग 03 हजार गांवों के 01 लाख 71 हजार हितग्राहियों को ई प्रॉपटी कार्ड (अधिकार अभिलेख) सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदान करने की औपचारिकता पूर्ण की गयी।

श्री मोदी ने सीहोर, हरदा और डिंडोरी जिलों के योजना से संबंधित हितग्राहियों से संवाद भी किया।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार योजना को जिन 9 राज्यों में प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया है, उनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है।

मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन तीन चरणों में 10-10 जिलों को शामिल कर क्रमबद्ध रूप से प्रारंभ किया गया है।

योजना के तहत सर्वे ऑफ इंडिया की सहायता से ग्रामों में बसाहट क्षेत्र पर ड्रोन के माध्यम से नक्शे का निर्माण तथा डोर-टू-डोर सर्वे कर अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया जा रहा है।

अभी तक मध्यप्रदेश के 42 जिलों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिसके तहत 24 ड्रोन की मदद से 24 जिलों में कार्य चल रहा है।

इनमें से 6500 ग्रामों में ड्रोन कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

हितग्राहियों को योजना का अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए सर्वे के नियमों को वर्तमान आवश्यकता के अनुसार सरल बनाया गया है।

इस योजना के तहत गांवों में अपना मकान बनाकर रहने वाले ग्रामवासियों को अपने घर का मालिकाना हक मिल सकेगा।

आबादी भूमि के कागजात मिल जाने से कानून का सहारा मिलने लगेगा। मनमर्जी से घर बनाने और अतिक्रमण की समस्या से निजात मिलेगी।

इसके अलावा सम्पत्ति का रिकार्ड हो जाने से बैंक लोन लिया जा सकेगा। भूमि संबंधी विवाद भी नियंत्रित होंगे।

जमीन एवं भवन के नामांतरण एवं बंटवारे आसानी से हो सकेंगे। सरकारी भवन भी योजनाबद्ध तरीके से निर्मित किये जा सकेंगे।

गाँव में आबादी की भूमि को लेकर भ्रम की स्थिति खत्म होगी।

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