बिहार में कांग्रेस के पास कोई युवा चेहरा नहीं था लेकिन अब कांग्रेस को बिहार में कन्हैया कुमार का चेहरा मिल गया है।
नई दिल्ली: जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और छात्र नेता कन्हैया कुमार अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। कन्हैया कुमार का चेहरा कांग्रेस पार्टी में युवा नेता के रूप मे शामिल किया गया हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तंज़ क्या है वहीं सीपीआई ने भी सियासी महत्वाकांक्षा को लेकर कन्हैया पर हमला क्या है।
सवाल ये है कि क्या कन्हैया कुमार को कांग्रेस में रहकर अभिव्यक्ति की वो आज़ादी मिलेगी जो उन्हें सीपीआई में हासिल थी? सवाल ये भी है कि लेफ्ट ideology वाले कन्हैया कुमार काँग्रेस पार्टी के विचारधारा में अपने आप को कैसे अडजस्ट कर पाएंगे?
हालांकि इससे पहले भी लेफ्ट से जुड़े कई छात्र नेता काँग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इस बीच जब किसी भी पार्टी का मेम्बर किसी भी दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं तो आम लोगों के बीच विचारधाराओं के फुसफूसेपन को लेकर बातें होने लागि हैं।
As Speculation abounds about certain Communist leaders joining @INCIndia it perhaps may be instructive to revisit a 1973 book ‘ Communists in Congress’ Kumarmanglam Thesis. The more things change the more they perhaps remain the same.
I re-read it todayhttps://t.co/iMSK8RqEiA— Manish Tewari (@ManishTewari) September 28, 2021
बिहार में कांग्रेस के पास कोई भी युवा चेहरा नहीं था जहां पार्टी अपनी हालत सुधारने के लिए नए चेहरों कि तलाश में थी।
अब कन्हैया कुमार के रूप में काँग्रेस को बिहार में एक चेहरा मिल गया है जिसे पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव के मद्दे-मुक़ाबिल पेश करने में कामयाब होती नज़र आ रही है।
लेकिन काँग्रेस पार्टी के रवायाती वॉटर्स अल्पसंख्यक और निचली जातियों के बीच अपनी साख खो चुकी कॉंग्रेस को कन्हैया कुमार का चेहरा किस हद तक मदद पहुंचाएगा ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।

